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Bramh Kamal
संतोषी माँ
Santoshi Maa

Santoshi Maa Ki Aarti

जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता। अपने सेवक जन की, सुख सम्पत्ति दाता॥ सुंदर चीर सुनहरी, मां धारण कीन्हो। हीरा पन्ना दमके, तन शृंगार लीन्हो॥ जय संतोषी माता। गेरू लाल छटा छबि, बदन कमल सोहे। मंद हंसत करुणामयी, त्रिभुवन जन मोहे॥ जय संतोषी माता। स्वर्ण सिंहासन बैठी, चंवर ढुरे प्यारे। धूप, दीप, मधु, मेवा, भोज धरे न्यारे॥ जय संतोषी माता। गुड़ और चना परमप्रिय, तामे संतोष किये। सन्तोषी कहलाई, भक्तन वैभव दिये॥ जय संतोषी माता। दुखी दरिद्री, रोगी, संकटमुक्त किये। बहु धन-धान्य भरे घर, सुख सौभाग्य दिये॥ जय संतोषी माता। सन्तोषी माता की आरती, जो कोई जन गावे। ऋद्धि-सिद्धि, सुख-सम्पत्ति, जी भर के पावे॥ जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता।


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